महासमुंद, 24 अक्टूबर 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय शनिवार को महासमुंद जिले के बसना विकासखंड के ऐतिहासिक ग्राम गढ़फुलझर में आयोजित रामचंडी सम्मेलन में शामिल हुए। कार्यक्रम में शामिल होने से पूर्व मुख्यमंत्री श्री साय ने श्री श्री रणेश्वर रामचंडी मंदिर पहुंचकर मां रणेश्वर रामचंडी की विधिवत पूजा-अर्चना की। उन्होंने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और निरंतर उन्नति की कामना की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मां रणेश्वर रामचंडी के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं से है। प्रदेश के प्राचीन मंदिर हमारी आस्था के साथ-साथ हमारी गौरवशाली संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत के प्रतीक हैं। ऐसे धार्मिक स्थल समाज में सद्भाव, एकता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में धार्मिक विरासत के संरक्षण पर दिया जोर
रामचंडी सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मां रणेश्वर रामचंडी की महिमा का उल्लेख करते हुए क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की प्राचीन परंपराएं और ऐतिहासिक धरोहरें हमारी अमूल्य संपत्ति हैं। इनका संरक्षण और संवर्धन करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मां रामचंडी का दरबार श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है। यहां आने वाले भक्त मां के दर्शन कर सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने और हमारी परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
उन्होंने क्षेत्र की धार्मिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि गढ़फुलझर जैसे ऐतिहासिक स्थल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध बनाते हैं। ऐसे स्थलों को संरक्षित कर पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।
मां रामचंडी मंदिर है आस्था का प्रमुख केंद्र
महासमुंद जिले के बसना अंचल में स्थित श्री श्री रणेश्वर रामचंडी मंदिर अपनी प्राचीन सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर मां रामचंडी को समर्पित है और क्षेत्र के श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्रभु श्रीराम ने लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए जिस शक्ति स्वरूपा देवी की आराधना की थी, वही आदिशक्ति मां रामचंडी के रूप में यहां विराजमान हैं। इसी मान्यता के चलते श्रद्धालु मां को शक्ति, साहस और विजय की प्रतीक देवी के रूप में पूजते हैं।
मंदिर में शारदीय और चैत्र नवरात्रि के अवसर पर भव्य धार्मिक उत्सव एवं मेले का आयोजन किया जाता है। इस दौरान दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। नवरात्रि में मंदिर परिसर में लगभग 3500 से अधिक मनोकामना ज्योत प्रज्वलित किए जाने की परंपरा है। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए मां के दरबार में ज्योत जलाते हैं।
भैना राजाओं के ऐतिहासिक किले से जुड़ा है गढ़फुलझर
गढ़फुलझर का इतिहास प्राचीन राजवंशों और ऐतिहासिक धरोहरों से जुड़ा हुआ है। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में यहां भैना राजाओं का शासन था। सुरक्षा की दृष्टि से यहां एक विशाल किले का निर्माण कराया गया था, जिसके अवशेष आज भी क्षेत्र के ऐतिहासिक गौरव की गवाही देते हैं।
मंदिर परिसर के समीप स्थित राजा तालाब और रानी तालाब तत्कालीन राजसी जीवन और स्थापत्य परंपरा की स्मृतियों को संजोए हुए हैं।
गढ़फुलझर की ऐतिहासिक पहचान से जुड़ी एक अन्य मान्यता के अनुसार, सिख धर्म के प्रथम गुरु गुरु नानक देव जी भी अपनी यात्रा के दौरान इस क्षेत्र में आए थे। कहा जाता है कि उस समय यहां के राजा ने उन्हें चार एकड़ भूमि दान में दी थी। यह मान्यता क्षेत्र की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को और भी विशिष्ट बनाती है।
मंच पर मौजूद रहे जनप्रतिनिधि
रामचंडी सम्मेलन के अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान, खाद्य मंत्री श्री दयाल दास बघेल, महासमुंद सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, रायपुर उत्तर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, बसना विधायक श्री संपत अग्रवाल, सरायपाली विधायक श्रीमती चातुरी नंद सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का गढ़फुलझर आगमन धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक गौरव के प्रति सम्मान का प्रतीक रहा। मां रणेश्वर रामचंडी के दर्शन एवं रामचंडी सम्मेलन में सहभागिता से क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का वातावरण बना रहा।
रामचंडी सम्मेलन में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मां रणेश्वर रामचंडी मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की, गढ़फुलझर की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को किया नमन
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